मुक्तसिर सा गम ही मार डालेगा

27 Likes 1 Comment
  • Save

उसने कहा था छोड़ दे मुझे बेवफा समझकर

खामोश रह गये हम वक्त की हवा समझकर

सिवा आंसुओं के कुछ भी गिरा नहीं

उन्हें भी पी गये हम दवा समझकर

बेरुखी साफ नज़र आई मेरे मेहबूब तेरे रुखसार पर

चाहत ए इश्क है उसे भी भुला दिया तेरी अदा समझकर

फिर ज़िंदगी मेरी गफलत ए अंजाम पर पहुंची

इस बार भी लौट आये तेरी सदा समझकर

आसान नहीं है अगर तो बहुत मुश्किल भी कहां था

बदल तो सकते थे खुद को मेरी इल्तेजा समझकर

शायर – बाबू कुरैशी

  • Save

You might like

Babu Qureshi

About the Author: Babu Qureshi

I belong from Bhopal, M.P.India. I am Oscar Award Nominee and Grammy Awards Nominee for the first time in 2014. I am also a novel writer, film script writer& member of SWA,Mumbai.

1 Comment

Leave a Reply

16 Shares 1.9K views
Share via
Copy link
Powered by Social Snap